वर्तमान में ज्योतिष शास्त्र की महत्ता को देखते हुए इस ब्लॉग को बनाया गया है। यहाँ अध्ययन करके आप स्वयं भी कुंडली परीक्षण कर सकते है और साथ ही ज्योतिष शास्त्र का अध्ययन भी कर सकते है।
प्रायः अधिकांशतः सभी को ज्ञात होता है कि हमारी जन्म कुंडली का सप्तम भाव भार्या व विवाह स्थान कहलाता है । लेकिन यह तथ्य बहुत कम व्यक्तियो को ज्ञात होता है कि जीवन साथी से अलग...
दिलबल ग्रह अपनी दिशा स्वामित्व के अनुसार बलवान होता है। जो भी ग्रह दिग्बली होता है उसे जिस भी राशि में जितना बल मिलता है उससे ज्यादा बल उस ग्रह को मिलता है जिसे दिग्बली या दिशाबली ग्रह कहते है।इसके विपरीत जो ग्रह अपनी स्वामित्व क…
★ एक हाथ से प्रणाम नही करना चाहिए। ★ सोए हुए व्यक्ति का चरण स्पर्श नहीं करना चाहिए। ★ बड़ों को प्रणाम करते समय उनके दाहिने पैर पर दाहिने हाथ से और उनके बांये पैर को बांये हाथ स...
१. यदि १० भाव में मंगल हो, या १० भाव पर मंगल की दृष्टी हो। २. यदि मंगल ८ वे भाव के अतिरिक्त कही पर भी उच्च राशी मकर (१०) का हो तो। ३. मंगल केंद्र १, ४, ७, १०, या त्रिकोण ५, ९ में हो तो। ४. यदि ल...
इस लग्न का स्वामी गुरु है तथा यह लग्न गुरु-शनि और बुध के किसी एक के नक्षत्र में समाहित होती है. गुरु दशम का भी स्वामी होता है लेकिन लग्नेश होने से इसे केन्द्रीय दोष नहीं लगता ...
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