वर्तमान में ज्योतिष शास्त्र की महत्ता को देखते हुए इस ब्लॉग को बनाया गया है। यहाँ अध्ययन करके आप स्वयं भी कुंडली परीक्षण कर सकते है और साथ ही ज्योतिष शास्त्र का अध्ययन भी कर सकते है।
द्विभार्या योग ― राहू लग्न में पुरुष राशि (सिंह के अलावा) में हो अथवा 7वें भाव में सूर्य, शनि, मंगल, केतु या राहू में से कोर्इ भी दो ग्रह (युति दृष्टि द्वारा) जुड़ जाएं तो द्विभा...
ज्योतिष के अनुसार नौ आदतों से नवग्रहो का सम्मान कर सुधारें अपना घर और जीवन ― १) अगर आपको कहीं पर भी थूकने की आदत है तो यह निश्चित है कि आपको यश, सम्मान अगर मुश्किल से मिल भी जात...
1 लग्न एवं पंचम भाव में सूर्य , मंगल एवं शनि स्थित हो एवं अष्टम या द्वादश भाव में बृहस्पति, राहु से युति कर स्थित हो पितृशाप से संतान नही होती। 2 सूर्य को पिता का एवं बृहस्पति को ...
जब भी जन्मकुंडली में राहु और मंगल एक साथ हो तो जातक या तो खुद दूसरों से धोखा खा जाता है या फिर दूसरों को खुद धोखा दे देता है | यदि जातक का लग्नेश कमजोर हो तो वो खुद धोखा खा जाता है ...
अगर भाग्य साथ नहीं दे रहा है काम रुक रुक के बन रहे है। तो देखिए अपनी कुंडली में भाग्य का मालिक कोनसे देवता है उन्हें निम्न उपाय से प्रसन्न करें।। सूर्य भाग्येश सूर्य को प्र...
कुंडली में नौवें और दसवें स्थान का बड़ा महत्त्व होता है। जन्म कुंडली में नौवां स्थान भाग्य का और दसवां कर्म का स्थान होता है। कोई भी व्यक्ति इन दोनों घरों की वजह से ही सबसे ज...
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