अगर भाग्य साथ नहीं दे रहा है काम रुक रुक के बन रहे है। तो देखिए अपनी कुंडली में भाग्य का मालिक कोनसे देवता है उन्हें निम्न उपाय से प्रसन्न करें।।

सूर्य

भाग्येश सूर्य को प्रबल करने के लिए निम्न उपाय करें।
1. गायत्री मंत्र का जप करें।
2. सूर्य को नियमित जल दें।
3. ''ऊँ खोल्काय नमः'' मंत्र का जप करें।

चंद्र

भाग्येश चन्द्र को अनुकूल करने के लिए निम्नलिखित उपाय करें।
1. ॐ श्रां: श्रीं: श्रौं: सः चंद्रमसे नमः का जप करें।
2. चांदी के गिलास में जल पिएं।
3. शिव जी की उपासना करें।

मंगल

भाग्येश मंगल को अनुकूल करने के लिए निम्न उपाय करें।
1. मजदूरों को मंगलवार को मिठाई खिलाएं।
2. लाल मसूर का दान करें।
3. मंगलवार को सुंदर कांड का पाठ करें।

बुध

यदि बुध भाग्येश होकर फलदायक न हो तो निम्न उपाय करने चाहिए।
1. तांबे का कड़ा हाथ में धारण करें।
2. गणेश जी की उपासना करें।
3. गाय को हरा चारा खिलाएं।

गुरु

यदि गुरु के कारण भाग्य साथ न दे रहा हो तो निम्नलिखित उपाय करें।
1. विष्णु जी की आराधना करें।
2. गाय को आलू में हल्दी लगा कर खिलाएं।
3. गुरुवार को पीली वस्तुओं का दान करें।

शुक्र

यदि शुक्र भाग्येश होकर फलदायक न हो तो निम्न उपाय करने चाहिए।
1. स्फटिक की माला से ओम शुक्र देवाय नमः की एक माला का जप करें।
2. शुक्रवार को चावल का दान करें।
3. लक्ष्मी जी की उपासना करें।

शनि

भाग्येश शनि को मजबूत करने के लिए निम्न उपाय करें।
1. काले वस्त्रों तथा नीले वस्त्रों को यथा संभव न पहनें।
2. शनिवार को पीपल के वृक्ष के नीचे दिया जलाएं।
3. शनिवार को हनुमान चालीसा का पाठ करें।

आपके लग्न अनुसार योगकारक ग्रह इस प्रकार हैं
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1. मेष लग्न के लिए गुरु राजयोग कारक होता है।

2. वृष लग्न के जातको के लिए शनि शुभ फलदायक है क्योकि शनि केन्द्र तथा त्रिकोण का स्वामी होकर योगकारक है।

3. मिथुन लग्न के लिए शुक्र अच्छा फल देता है।

4. कर्क लग्न के लिए मंगल ग्रह पंचम तथा दशम का स्वामी होने से अत्यधिक शुभ तथा योगकारक बन जाता है।

5. सिंह लग्न में मंगल 4, 9 भाव का स्वामी हो कर अत्यंत योगकारक ग्रह है।

6. कन्या लग्न के लिए शुक्र नवमेश होकर अच्छा फल देता है।

7. तुला लग्न में शनि 4, 5 शुभ भावों का स्वामी हो कर योगकारक ग्रह बन जाता है।
   

8. वृश्चिक लग्न के लिए चंद्रमा अच्छा फल देता है।

9. धनु लग्न में गुरु अति योगकारक ग्रह है।

10. मकर लग्न के लिए शुक्र केन्द्र तथा त्रिकोण का स्वामी होने से योगकारक बन जाता है और शुभ फल प्रदान करता है.

11. कुंभ लग्न में चर्तुथेश और नवमेश में शुक्र ग्रह होता है। इस लग्‍न में जन्‍मे जातकों के लिए यह योगकारक ग्रह माना जाता है।

12. मीन लग्न के लिए चंद्रमा व मंगल शुभ फल देते हैं।