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Showing posts with the label सरल ज्योतिषShow all
ग्रहों से होने वाले सम्बंधित रोग

सूर्य के बाद धरती के उपग्रह चन्द्र का प्रभाव धरती पर पूर्णिमा के दिन सबसे ज्यादा रहता है। जिस तरह मंगल के प्रभाव से समुद्र में मूंगे की पहाड़ियां बन जाती हैं और लोगों का खून दौड़ने लगता है उसी तरह चन्द्र से समुद्र में ज्वार-भाटा …

सोने का सही तरीका ज्योतिष शास्त्र के अनुसार

नमस्कार मित्रों, क्या आपने कभी सोचा कि जब हम रात को सोते हैं तो हम सोते वक्त कितनी गलतियां करते हैं। चलिये आज मैं आपको सोते समय हम कौन-कौन सी गलतियां करते हैं बताता हूँ- 1. सूने घर में अकेला नहीं सोना चाहिए। देवमन्दिर और श्मशान म…

जानें विवाह के योग

आजकल लड़के-लड़कियाँ उच्च शिक्षा या अच्छा करियर बनाने के चक्कर में बड़ी उम्र के हो जाने पर विवाह में काफी विलंब हो जाता है। उनके माता-पिता भी असुरक्षा की भावनावश बच्चों के अच्छे खाने-कमाने और आत्मनिर्भर होने तक विवाह न…

रोग विचार

शरीर में कोई भी रोग व विकार का शारीरिक प्रक्रिया में अन्दुरुनी विकार ही समस्या की जड़ है.इससे सम्बन्धित व्यक्ति का लग्न ,  ( जो कि व्यक्ति का प्रतिनिधि है ) पीड़ा को बताता है. इसी...

तुलसी के पौधे का महत्व

आपके घर परिवार या आप पर कोई मुसीबत आने वाली होती है तो उसका असर सबसे पहले आपके घर में स्थित तुलसी के पौधे पर होता है। आप उस पौधे का कितना भी ध्यान रखें। धीरे-धीरे वो पौधा सूखने ...

ज्योतिष में रोग विचार के लिए विचारणीय सूत्र

ज्योतिष में रोग विचार : षष्ठ स्थान ग्रहों, राशियों, कारकग्रह ,  . छः भावों का विश्लेषण:प्रथम भाव या लग्न, षष्ठ, अष्टम एवं द्वादश भावों ,मारक भाव द्वितीय एवं सप्तम का रोग ,स्वास्...

शयन के नियम

🌺सूने घर में अकेला नहीं सोना चाहिए। देवमन्दिर और श्मशान में भी नहीं सोना चाहिए। (मनुस्मृति) 🌺किसी सोए हुए मनुष्य को अचानक नहीं जगाना चाहिए। (विष्णुस्मृति) 🌺विद्यार्थी, न...

लग्न से जानिए शरीर के रोग-रखें सावधानी और परहेज

जन्मकुंडली का छठा (6) और ग्यारहवाँ (11) भाव रोग के भाव माने जाते है यानि इन भावों से हमें होने वाले रोगों की संभावित जानकारी मिल सकती है। यदि इन भाव के स्वामी अच्छी स्थिति में हो त...

चन्द्र और चन्द्र लग्न का महत्व

प्रत्येक जन्मपत्री में दो लग्न बनाये जाते हैं। एक जन्म लग्न और दूसरा चन्द्र लग्न। जन्म लग्न को देह समझा जाये तो चन्द्र लग्न मन है। बिना मन के देह का कोई अस्तित्व नहीं होता ...

दिग्बली और दिग्बल हीन ग्रह

दिलबल ग्रह अपनी दिशा स्वामित्व के अनुसार बलवान होता है। जो भी ग्रह दिग्बली होता है उसे जिस भी राशि में जितना बल मिलता है उससे ज्यादा बल उस ग्रह को मिलता है जिसे दिग्बली या दिशाबली ग्रह कहते है।इसके विपरीत जो ग्रह अपनी स्वामित्व क…

अति महत्वपूर्ण बातें पूजा से जुड़ी हुई

★ एक हाथ से प्रणाम नही करना चाहिए। ★ सोए हुए व्यक्ति का चरण स्पर्श नहीं करना चाहिए। ★ बड़ों को प्रणाम करते समय उनके दाहिने पैर पर दाहिने हाथ से और उनके बांये पैर को बांये हाथ स...

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