शरीर में कोई भी रोग व विकार का शारीरिक प्रक्रिया में अन्दुरुनी विकार ही समस्या की जड़ है.इससे सम्बन्धित व्यक्ति का लग्न , ( जो कि व्यक्ति का प्रतिनिधि है ) पीड़ा को बताता है.
इसीलिए किसी भी व्यक्ति की कुण्डली में लग्न की शुभाशुभ,पाप तथा मारक ग्रहों का उल्लेख किया जाता है.जिनकी दशा-अन्तर्दशा अवस्थानुसार ग्रह शुभ-अशुभ फल ले कर देने का संकेत करते हैं.
इस दौरान व्यक्ति को कौन सा रोग ,शारीरिक कष्ट,किस अंग में समस्या आदि का अध्यन से मालुम हो जाता है.लेकिन इसके लिए अनुभव व अध्यन बहुत ही अच्छा होना चाहिए.फलित बताने के साथ साथ व्यक्ति से सम्बन्धित सवाल व जवाब भी करना चाहिए..क्यूंकि हर ग्रह कई रोग के प्रतिनिधित्व करते हैं.
ऐसी अवस्था में लग्न व लग्नेश को मजबूती देने से कुछ लाभ अवश्य मिलता है।
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