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Showing posts with the label ग्रहो की युतिShow all
इन युक्तियों के कारण बनता है पितृ दोष कुंडली में

1 लग्न एवं पंचम भाव में सूर्य , मंगल एवं शनि स्थित हो एवं अष्टम या द्वादश भाव में बृहस्पति, राहु से युति कर स्थित हो पितृशाप से संतान नही होती। 2 सूर्य को पिता का एवं बृहस्पति को ...

चन्द्र ग्रह (भाग-३)

कुंडली के बारह भावों में चंद्रमा का फल— 1. पहले लग्न में चंद्रमा हो तो जातक बलवान, ऐश्वर्यशाली, सुखी, व्यवसायी, गायन वाद्य प्रिय एवं स्थूल शरीर का होता है। 2. दूसरे भाव में चंद्...

चन्द्र ग्रह (भाग-२)

क्या है चंद्रमा के प्रभाव आपकी कुंडली में— कुंडली में चंद्रमा की स्थिति और उस पर दूसरे ग्रहों के प्रभावों के आधार पर इस बात की गणना करना बहुत आसान हो जाता है कि मनुष्य की मा...

चन्द्र ग्रह (भाग - १)

जानिए आपकी कुंडली में चन्द्रमा का प्रभाव,महत्त्व और फल तथा उपाय — ऋग्वे द में कहा गया है कि ‘चन्द्रमा मनसो जातश्चक्षोः सूर्यो अजायत:।‘  अर्थात चंद्रमा जातक के मन का स्वा...

शनि राहु की युति

मित्रों आज  ज्योतिष में एक   बहुत   ही  महत्वपूर्ण   माने  जाने  वाले  योग   राहु शनि  की  युति  पर लिख रहा हूँ। आमतोर  पर इस  योग  को  सर्प  योग  की  संज्ञा  विद्वानों  के  द...

स्त्रियों से सम्बन्धित बातें

जिस स्त्री के सप्तम में शनि+बुध की युति है तो ऐसी स्त्रियों के पति नपुंसक होते है यह युति संतान सुख में बाधक होता है। सप्तम में सूर्य और शनि का होना दाम्पत्य के लिए शुभ संकेत ...

सप्तम स्थान पर चन्द्रमा

मित्रों ज्योतिष में सप्तम भाव हमारे विवाहिक जीवन का,व्यापार का,डेली इनकम का,साझेदारी में व्यवसाय आदि का माना जाता है और साथ ही ये भाव मारक भाव भी होता है| आज हम इस भाव में चन्...

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