वर्तमान में ज्योतिष शास्त्र की महत्ता को देखते हुए इस ब्लॉग को बनाया गया है। यहाँ अध्ययन करके आप स्वयं भी कुंडली परीक्षण कर सकते है और साथ ही ज्योतिष शास्त्र का अध्ययन भी कर सकते है।
1 लग्न एवं पंचम भाव में सूर्य , मंगल एवं शनि स्थित हो एवं अष्टम या द्वादश भाव में बृहस्पति, राहु से युति कर स्थित हो पितृशाप से संतान नही होती। 2 सूर्य को पिता का एवं बृहस्पति को ...
कुंडली के बारह भावों में चंद्रमा का फल— 1. पहले लग्न में चंद्रमा हो तो जातक बलवान, ऐश्वर्यशाली, सुखी, व्यवसायी, गायन वाद्य प्रिय एवं स्थूल शरीर का होता है। 2. दूसरे भाव में चंद्...
क्या है चंद्रमा के प्रभाव आपकी कुंडली में— कुंडली में चंद्रमा की स्थिति और उस पर दूसरे ग्रहों के प्रभावों के आधार पर इस बात की गणना करना बहुत आसान हो जाता है कि मनुष्य की मा...
जानिए आपकी कुंडली में चन्द्रमा का प्रभाव,महत्त्व और फल तथा उपाय — ऋग्वे द में कहा गया है कि ‘चन्द्रमा मनसो जातश्चक्षोः सूर्यो अजायत:।‘ अर्थात चंद्रमा जातक के मन का स्वा...
मित्रों आज ज्योतिष में एक बहुत ही महत्वपूर्ण माने जाने वाले योग राहु शनि की युति पर लिख रहा हूँ। आमतोर पर इस योग को सर्प योग की संज्ञा विद्वानों के द...
जिस स्त्री के सप्तम में शनि+बुध की युति है तो ऐसी स्त्रियों के पति नपुंसक होते है यह युति संतान सुख में बाधक होता है। सप्तम में सूर्य और शनि का होना दाम्पत्य के लिए शुभ संकेत ...
मित्रों ज्योतिष में सप्तम भाव हमारे विवाहिक जीवन का,व्यापार का,डेली इनकम का,साझेदारी में व्यवसाय आदि का माना जाता है और साथ ही ये भाव मारक भाव भी होता है| आज हम इस भाव में चन्...
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