जब भी जन्मकुंडली में राहु और मंगल एक साथ हो तो जातक या तो खुद दूसरों से धोखा खा जाता है या फिर दूसरों को खुद धोखा दे देता है | यदि जातक का लग्नेश कमजोर हो तो वो खुद धोखा खा जाता है और यदि लग्नेश बलवान हुआ तो जातक दूसरों को धोखा दे देता है | गोचर में जब दशमेश का सम्बन्ध जब द्वितीयेश और अष्टमेश से बनता है तो ऐसे योग बनते है | ऐसे में लग्नेश की स्थिति का आकलन अवश्य करना चाहिए। लग्नेश जब कमजोर हो तो जातक में जूठ बोलने , दूसरों की चुगली करने , अपनी बात पर न डटे रहने आदि की आदत हो जाती है | जब लग्नेश पर किसी शुभ ग्रह की दृष्टि न हो या केवल पाप ग्रह शनि,राहु केतु की दृष्टि या युति हो तो ऐसा योग प्रबल रूप से अपना प्रभाव दिखाता है।
दशमेश यदि पाप ग्रह से युक्त या दृष्ट हो और दशम भाव भी ऐसे ही पीड़ित हो तो जातक अपने व्यवसाय में साझेदारों के साथ धोखा करके आगे बढ़ता है या फिर उनसे उसे खुद धोखा खाना पड़ता है |
आप अपनी कुंडली पर ये नियम लगाकर देख सकते है की आपके उपर ये कितना लागू हो रहा है या नही हो रहा है |
अपना अनुभव अवश्य लिखे।
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