मित्रों जन्मकुंडली में जब भी सूर्य चन्द्र एक साथ हो तो उसे कई विद्वानों द्वारा अमावस्या दोष का नाम दिया जाता है क्योंकि ऐसा केवल अमावस्या के आसपास वाले दिन ही होता है | चूँकि चन्द्र वैसे तो एक शुभ ग्रह है लेकिन ऐसा माना जाता है की जब चन्द्र सूर्य के पास हो तो वो छिण होकर पापी हो जाता है और फिर जातक को पापी ग्रह के समान फल देता है। चन्द्र जिन जिन कारकों का प्रतिनिधित्व करता है उनके सुख में कमी कर देता है जैसे की माता , मानसिक शांति आदि।
लेकिन मैंने अपने अनुभव में इस सिद्धांत को लागू होते हुए बहुत कम पाया है | जब हम इसका ध्यान से अध्ययन करे तो सबसे पहले हम कालपुरुष की कुंडली देखते है जहाँ चन्द्र चोथे और सूर्य पंचम भाव का मालिक होता है और महर्षि पराशर जी के अनुसार जब भी केंद्र त्रिकोण के ग्रह आपस में सम्बन्ध बनाते है तो वो राजयोग बनाते है तो जहाँ तक मेरा विचार है इन दोनों की युति जातक को अशुभ फल न देकर शुभ फल देती है | कुछ लोग कह देते है की चन्द्र सूर्य के साथ होने पर अस्त हो जाता है लेकिन कुछ विद्वानों का ये मानना भी है की चन्द्र कभी अस्त नही होता और उसका फल जातक को मिलता है। ऐसे में मै चन्द्र के अस्त न होने वाले विचार का समर्थन करता हूँ |
सूर्य को पिता का कारक और चन्द्र को माता का कारक ज्योतिष में माना गया है और ऐसे में माता पिता का एक साथ होना जातक को कैसे अशुभ फल देगा ये मेरी समझ से बाहर है | सूर्य सारे संसार को प्रकाश देता है और सूर्य की गैर मौजुदगी में चन्द्र सूर्य से प्रकाश लेकर पृथ्वी तक पहुंचाता है | सूर्य हमारी दाई आँख का प्रतिनिधित्व करता है तो चन्द्र बाई आँख का | जब दोनों एक जैसी हो तो जातक की सुन्दरता में चार चाँद लगा देती है | दायाँ स्वर सूर्य तो बायाँ स्वर चन्द्र दर्शाता है |
यदि हम लाल किताब के दृष्टीकोण से देखें तो इन दोनों की युति को बड का दूध दर्शाता है जो की कुछ गंभीर बिमारी जैसे धात आदि में जातक की रक्षा भी करता है | हस्तरेखा में सूर्य रेखा जब ह्दय रेखा से मिल जाती है तो जातक का बुढ़ापा उम्दा गुजरता है, जातक को मन की शांति मिलती है और उसे धन दौलत की कमी का सामना नही करना पड़ता है |
लेकिन इनकी युति का अशुभ फल तब जातक पर पड़ता है जब इनके मुकाबले पर यानी की इनकी युति से आठवें भाव में शनि, राहू या केतु हो या फिर कुंडली में मंगल बद्द हो या फिर चोथे या पंचम भाव में शनि राहू केतु हो तो फिर जातक दिन रात दुखिया , मुसीबत पर मुसीबत , न रात को आराम न दिन में चैन मिलता है।
इनकी युति यदि इनके मित्र ग्रह की राशि में हो तो इनके शुभ फल जातक को मुख्य रूप से मिलते है लेकिन इनके शत्रु ग्रह की राशि में इनकी युति के शुभ फल जातक को कम ही मिल पाते है।
आगे लाल किताब के अनुसार भाव के अनुसार इनकी युति के फल लिख रहा हूँ।
पहले भाव में इनकी युति जातक को राजा की तबीयत वाला इंसान बनती है लेकिन जातक की मौत अचानक से होती है |
दुसरे भाव में युति तो शुभ फल देती है लेकिन स्त्री वर्ग से सम्बन्धित झगड़ा जातक को नुक्सान करता है |
तीसरे भाव में ये युति जातक को स्वार्थी लेकिन उसके खुद के लिय उत्तम फल देती है |
चोथे भाव में राजा की हसियत की आदमी बनाती है , पूरा सुख आराम जातक को मिलता है , वाहन का सुख जातक को मिलता है |
पंचम में युति होने पर जातक की जिन्दगी आराम से बीतती है |
छ्टे भाव में इनकी युति शुभ फल देगी शर्त है की दुसरे भाव में पापी ग्रह न हो |
सप्तम, अस्ठ्म , दसम, बारवें भाव में इनकी युति का फल न होकर दोनों अपना अपना अलग अलग फल देंगे।
नवम भाव में युति से जातक को माता से विशेष लाभ मिलता है और सफर से जातक को लाभ मिलता है।
ग्यारवें भाव में इनकी युति शुभ फल नही देती है।
मित्रों इस प्रकार आप सूर्य चन्द्र की युति का फल आपकी कुंडली के हिसाब से लगा सकते है वैसे तो पूर्ण फल पूरी कुंडली के आधार पर ही मिलता है लेकिन इस से आप इनके फल का अनुमान अवस्य लगा सकते है।
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