कुम्भ अथवा मीन लग्न वालों के बारहवें भाव में स्थित शुक्र योगप्रद नहीं होता, परन्तु अन्य लग्नों के बारहवें भाव में स्थित शुक्र योगप्रद होता है।
शुक्र एक भोग-विलास का ग्रह है और उधर द्वादश भाव भी भोग-विलास का भाव है। इसलिए साधारणतया शुक्र जब भी द्वादश भाव में स्थित होता है, भोग-विलास व धनादि देता है।
लेकिन यहाँ ध्यान रखना चाहिए कि द्वादश भाव में शनि की राशि में शुक्र न स्थित हो। चूँकि शनि नैसर्गिक रूप से अभाव और निर्धनता का ग्रह है, इसलिए शुक्र के वहाँ स्थित होने पर वह शनि के गुणों से प्रभावित होकर शुभ फलों में न्यूनता ला देता है।
ऐसा कुम्भ और मीन लग्न में ही संभव हो पाता है क्योंकि जब लग्न कुम्भ होगा तो बारहवें भाव में शनि की मकर राशि पड़ेगी और जब लग्न मीन होगा तो बारहवें भाव में शनि की मूलत्रिकोण राशि कुम्भ पड़ेगी। इस कारण इन दो लग्नों के द्वादश भाव में स्थित शुक्र को बहुत शुभ नहीं माना गया है।