जानिये आपनी कुंडली के माध्यम से कैंसर रोग होने के योग ――
यदि जन्म कुंडली में मंगल, चंद्रमा और षष्ठेश की युति हो और साथ में सूर्य भी शामिल है तब व्यक्ति को कैंसर रोग होने की संभावना बनती है।
चंद्रमा व शनि छठे भाव में स्थिति है तब व्यक्ति को पचपन वर्ष की उम्र पार करने के बाद रक्त कैंसर हो सकता है।
जन्म कुंडली में बृहस्पति, शनि व केतु की युति कैंसर का कारण बनती है।
आश्लेषा नक्षत्र, लग्न या छठे भाव से संबंधित होने पर और मंगल से पीड़ित होने पर कैंसर होने की संभावना बनती है।
डॉ वी.बी. रमन के मत से छठे भाव का स्वामी पाप ग्रह होकर लग्न में स्थित हो या आठवें भाव में स्थित हो या दसवें भाव में स्थित हो तब कैंसर रोग होने की संभावना बनती है।
शनि छठे भाव में राहु के नक्षत्र में स्थित हो और पीड़ित हो तब कैंसर रोग की संभावना बनती है।
शनि और मंगल की युति छठे भाव में आर्द्रा या स्वाति नक्षत्र में हो रही हो।
त्वचा का कैंसर
मंगल और राहु छठे या आठवें भाव को पीड़ित कर रहे हों तब त्वचा का कैंसर हो सकता है।
छ्ठे भाव में मेष राशि हो या स्वाति या शतभिषा नक्षत्र पड़ रहा हो और शनि छठे भाव को पीड़ित कर रहा हो तब त्वचा कैंसर का रोग हो सकता है।
पेट का कैंसर
जन्म कुंडली में राहु या केतु लग्न में षष्ठेश के साथ हो.
छठा भाव पीड़ित हो और राहु या केतु, आठवें या दसवें भाव में स्थित हो।
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