तृतीयेश षष्ठ गत का शुभाशुभ फल
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तृतीय भाव व्यक्ति का श्रम व पराक्रम है। जिससे व्यक्ति खिलाड़ी भी बन सकता है।
यदि इनकी युति अथवा सम्बन्ध मंगल से होता है तो व्यक्ति का सैनिक बनने के संकेत होता हैं।
षष्ठस्थ तृतीयेश छोटे व बड़े भाई से अच्छे सम्बन्ध नहीं होने का संकेत देता है।
तृतीयेश तृतीय में ही बैठे तो व्यक्ति बहुत ही साहसी व जीवन में किसी और कैसी ही परिस्तिथ होने पर कभी न घबराने वाला होता है।
उच्च का चन्द्रमा यहाँ 2 भाई व 2 बहने होने का संकेत करता है।
मंगल इस स्थान में भले ही कारक हो लेकिन कारकाय नाशय के कारण भाई नहीं होते हैं।
लेकिन अनुभव में ...यदि तृतीयेश यहाँ पीड़ित है तो....
तुला लग्न में गुरु पंचम में हुआ तो संतान व स्वयं के लिए अच्छा नहीं होता है।
तृतीय सप्तम का भाग्य है और शैय्या का सुख भी...कुम्भ लग्न में गुरु तृतीय में व्यक्ति को कामुक बनाता है.लेकिन भाइयों के सहयोग से उन्नति भी करता है।
एक बात और....त्रुतीय्श यदि क्रूर ग्रह है और तृतीय से 6-8-12 भाव में बैठता है तो तृतीयेश एक अलग तरह का विपरीत योग भी बनाएगा।
षष्ठस्थ तृतीयेश समाज में बहुत ही प्रभावी बनाता है.कभी कभी जज और वकील भी बनते हैं।
किसी भी समस्या का समाधान निकालने में उस्ताद होता है।
दशमेश यदि 3 रे हों तो व्यक्ति ओने श्रम से उंचा स्थान प्राप्त करता है.लेकिन जीवन में चैन बैठने भी नहीं देता है।
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