जब भी कोई ग्रह लग्नेश होकर त्रिक भाव यानी 6,8,12 में बैठ जाता है तो उस जातक में उस ग्रह से सम्बंधित कारकत्व की कमी हो जाती है जैसे चन्द्र लग्नेश हो तो मानसिक बल की कमी, सूर्य हो तो आत्मिक बल की कमी , मंगल हो तो साहस की कमी ,शनि हो तो धैर्य की कमी , बुध हो तो बौद्धिकता की कमी , गुरु हो तो सहनसिलता की कमी , शुक्र हो तो सौंदर्यता की कमी आदि का सामना करना पड़ता है । ये मोटे रूप से लिखा है । ये ग्रह जिन जिन चीजों के कारक होते है उनके सुख में कमी जातक को देने के योग बना देते है ।
0 Comments