मित्रो आज कुन्ङली मिलान के वारे मे कुछ वात करते है मनुष्य के जीवन का मुख्य लक्ष्य चार बातों पर निर्भर रहता है - धर्म, अर्थ, काम और अंत में मोक्ष. विवाह मनुष्य के जीवन की सबसे महत्व पूर्ण घटना होती है, जिसके बाद वह गृहस्थ जीवन में प्रवेश करता है. इसी आश्रम में वह पुण्य के सारे काम कर सकता है. बच्चों के उत्पन्न होने से पित्र ऋण उतारा जाता है.
भारतीय समाज में आमतौर पर उस विवाह को मान्यता दी जाती है, जिसमें माता -पिता और समाज के बड़े बुजुर्गों की सहमति होती हो. प्रेम विवाह के लिए भी समाज और कानून की मान्यता अति आवश्यक है , वर्ना उस नवविवाहित जोड़े को अनेकों संघर्षों से गुजरना पड़ता है,ं. विवाह योग्य कन्या के लिए माता -पिता सुयोग्य वर की तलाश का कार्य किसी अनुभवी और विद्वान् ज्योतिषी के पास कुन्ङली मिलान के लिऐ जाते है. विद्वान् ज्योतिषी वर-वधु के संतुलित, सफल और समरस रिश्ते के लिए कुंडली मिलान करता है. यही कारण है की भारतीय समाज में सफल, अक्षुण और मधुर वैवाहिक जीवन रहा है. प्रेम विवाह में भी अवश्य गुण मिलान कर लेने चाहिए, यदि ज़रुरत हो तो आवश्यक उपाय भी करा लेनी चाहिए. पाप गृहों क़ी शांति अवश्य करा लेना चाहिए. विवाह को पूर्ण सुखी बनाने के लिए कुंडली मिलान के लिए निम्न लिखित बातों का ध्यान रखा जाना चाहिए:
१-लड़के का विवाह आयु के विषम वर्षों में हो और लड़की का सम में.
२-दोनों कुण्डलियाँ सही हैं या नहीं देख लेना चाहिए.
३-दोनों कुंडलियों क़ी अलग-२ स्वतंत्र रूप से भी जांच कर लेनी चाहिए .मसलन: होने वाली पत्नी जीवन के सभी क्षेत्रों में सफलता दिलाने वाली हो (धर्म,अर्थ,काम ,मोक्ष)।
दोनों के स्वभाव में लचीलापन, सहिस्नुता, विश्वास, सत्य वादिता, क्षमा शीलता, किसी भी स्थिति में एक दूसरे के साथ निर्वाह करने क़ी क्षमता .एक दूसरे का आदर और सम्मान ,धन धान्य, आयु , संतति , आदि के बारे में बिचार कर लेना चाहिए।
कुंडली मिलान -अष्टकूट गुण मिलान
कुंडली मिलान एक बहुत कठिन और जटिल कार्य है इसमें ज्योतिषी को बहुत समय लगाना पड़ता है. दोनों की कुंडलियों के मिलान के लिए इन आठ बातों का ध्यान रखा जाता है:
१. वर्ण
२. वश्य
३. तारा
४ योनी
५. गृह मैत्री
६-गण
७. भकूट
८. नाडी
इन आठों के कुल ३६ गुण होते हैं. इनका मुख्य उद्देश्य दो कुंडलियों की जाँच कर यह पता लगाना की लड़का और लड़की एक दूसरे के लिए उपयुक्त हैं या नहीं. इसके अनुसार:३६ में से २७ गुण मिलते हों तो उत्तम
२५ हैं तो अच्छा
और कम से कम १८ भी मिलते हैं तो विवाह हो सकता है यदि बाकी और बातें ठीक हैं तो.
इन आठ बिन्दुओं को जन्म नक्षत्र से देखा जाता है.
१. वर्ण मिलान --
३६ में से १ पॉइंट मिलता है, यदि दोनों में सही है. यह दोनों के अध्यात्मिक विकास के लिए देखा जाता है. लड़की का वर्ण लड़के के वर्ण से नीचे का ही होना चाहिए वर्ना पति के लिए अशुभ और जानलेवा भी हो सकता है.
२. वश्य-मिलान --
३६ में से २ गुण प्राप्त होते है लड़के की राशि ऐसी हो की लड़की को वश में रखे,तो अच्छा मिलान कहलाता है.
३. तारा मिलान --
३६ में से ३ पॉइंट. दोनों एक दूसरे के लिए कितने शुभ और अशुभ हैं.
४. योनि मिलान --
३६ में से ४ गुण , यौन संबंधों के लिए ,देखा जाता है जो कि सुखी वैवाहिक जीवन का आधार है.
५. ग्रह-मैत्री मिलान --
३६ में से ५, दोनों के स्वभाव, रुचियाँ, विचारधारा में कितना मेल हैं यह चन्द्र राशि पर आधारित होता है. ग्रह-मैत्री का विवाह के लिए बड़ा महत्व है.
६. गण-मैत्री मिलान --
३६ में से ६ पॉइंट, जनम- कुंडली में चन्द्र- नक्षत्र के आधार पर गणना की जाती है. यह क्षत्रियों के लिए विशेष रूप से अनिवार्य विन्दु है. देव, मनुष्य और राक्षस तीन गण, ठीक से मैच नहीं होने से गृहस्थ जीवन में झगडे और रिश्ते में तालमेल का अभाव रहता है.
७. भकूट मिलान --
३६ में से ७ पॉइंट, दोनों की कुंडली में चन्द्रमा की एक दूसरे से स्थिति कहाँ पर है देखा जाता है. इससे दोनों का एक दूसरे पर विश्वास,स्वास्थ्य, खुशियाँ धन धान्य, और आयु ,आदि की गणना की जाती है.
८. नाडी -मिलान --
३६ में से ८ पॉइंट्स, सबसे महत्वपूर्ण बिंदु है कुंडली मिलान के लिए. तीन नाड़ियाँ, चन्द्र नक्षत्रों के आधार पर वर्गीकरण (आदि, मध्य और अन्त्य). शारीरिक शक्ति, स्वभाव, स्वास्थ्य, इससे जाँचा जाता है. कहा जाता है कि वर -वधु की एक ही नाडी होने से संतानोत्पत्ति में परेशानी होती है.
इन ८ गुणों के अलावा भी कई और तरीकों से भी कुंडलियों कि जांच कि जाती है जैसे कि:
१. कुंडली में मांगलिक- दोष होना ,यदि है तो निवारण हो सकता है या नहीं ?
२. लड़की क़ी कुंडली में बृहस्पति क़ी क्या स्थिति है. लड़के क़ी कुंडली में शुक्र क़ी स्थिति.
३. चन्द्र , सूर्य क़ी स्थिति.
४. कोई अन्य दोष तो नहीं?
५. वेध.
६. इसके अलावा कई तरीके से और गहरे में जा कर कुंडलियों का अध्ययन किया जाता है।
और इस तरह से सर्वश्रेष्ठ मिलान वाली कुंडलियों को मिलाकर ही शादी की जानी चाहिए।
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