क्या आप जानते हैं कि रत्न कई बीमारी को दूर करने मैं भूमिका निभाते हैं। रत्न सिर्फ पहनने के लिये ही नही वरन कई समस्याओं के निवारण से लेकर बीमारियों को दूर करने और बीमारी से मुक्ति दिलाने तक मदद करते हैं।
इस श्रंखला मैं हम यही समझने का प्रयास करते हैं कि कौनसा रत्न किस बीमारी को कैसे दूर कर सकता हैं ।
सूर्य रत्न माणिक
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सूर्य का रत्न माणिक अस्थि तंत्र को मजबूत रखता है। यह रक्त में सुधार, खून की कमी दूर करने, शारीरिक कमजोरी, हृदय गति और पागलपन को भी ठीक रखने में सहायक होता है। नेत्र रोगों में भी माणिक धारण करना शुभ फल प्रदान करता है।
चन्द्र रत्न मोती
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चन्द्र रत्न मोती गर्मी से उत्पन्न रोगों, हृदय व धमनियों में खून के संचालन में व्यवधान व दिमागी बीमारियों को भी ठीक करता है। मोती पहनने से पुराना दमा, किडनी, गालस्टोन, हैजा आदि रोग और स्त्रियों की माहवारी के रोग भी ठीक किए जा सकते हैं। यह कमजोरी व गुस्सा कम करने हेतु भी पहना जाता है।
मंगल रत्न मूंगा
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मंगल रत्न मूंगा शरीर में खून व मज्जा पर अधिकार रखता है। उच्च रक्तचाप, बवासीर, दांत दर्द आदि का इलाज मूंगा पहनने से हो सकता है। यह लीवर की अनेकों समस्याओं को दूर कर शरीर को निरोग बनाता है।
बुध रत्न पन्ना
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पन्ना धारण करने से अनेक रोगों से मुक्ति मिल सकती है। वाक दोष, तुतलाना, हकलाना, चर्म रोग, अपच, अत्यधिक गैस तकलीफ वालों को पन्ना पहनना चाहिए।
गुरु रत्न पुखराज
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गुरू रत्न पुखराज धारण करने से लीवर, जिगर व पेट के रोग में भी लाभ होता है।
शुक्र रत्न हीरा
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शुक्र रत्न हीरा थाइराइड, वीर्य दोष व शुक्र दुर्बलता आदि रोगों पर जल्द प्रभाव दिखाता है।
शनि रत्न नीलम
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नीलम धारण करने से गठिया, रक्त विकार, चर्म रोगों से मुक्ति मिलती हैं।
साथ ही अत्यधिक चक्कर आने व दिमाग संबंधी रोग होने एवं लकवा होने पर खूनी नीलम पहनना भी लाभ देता हैं।
कैसे कार्य करते है रत्न बीमारी दूर करने में?
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जब किसी ग्रह विशेष की किरणें मानव देह पर उचित परिमाण में नहीं पड़ती तब इन किरणों के अभाव में मानव देह विभिन्न रोगों से ग्रस्त हो जाती है। तब विशेषज्ञ सम्बंधित गृह का रत्न धारण कराकर उस रंग की किरणों की आपूर्ति पूरी कराते हैं, जो शरीर के अंगों से टकराकर ऊर्जा प्रदान करती और नकारात्मक बीमारी से दूर करती हैं ।
सम्बंधित गृह के उपचार हेतु कुछ व्यक्तियों को रत्न धारण की सलाह देते हैं एवं कुछ को उसी रत्न से उत्सर्जित हुई किरणों से प्रभावित ओषधि का सेवन करने का परामर्श देते है अथवा कुछ व्यक्तियों को रत्न प्रक्षालित जल पिला कर उसके रोग का निदान किया जाता है अथवा कुछ पीड़ित व्यक्तियों को रत्न सम्पर्कित तेल का प्रयोग करा उसके रोग का उपचार किया जाता है जाता है एवं गम्भीर रोगों से पीड़ित व्यक्तियों को सम्बंधित रत्न की भस्म का सेवन करने का परामर्श एवं अनिवार्यता बताई जाती है।
आज की बीमारी और रत्न सम्बन्धी सलाह
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आज से हम रोज किसी बीमारी , उसके ज्योतिष कारण एवं किस रत्न को धारण करने से समस्या से निजात मिलेगी इस पर चर्चा करेंगे ।
आज की बीमारी पेस्टिक
"अल्सर"
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पाचक क्षेत्र के भीतर होने वाला कोई भी विकार या थोड़ा पेप्टिक अल्सर कहलाता है। पेट की झिल्ली में अम्लों के दुष्प्रभाव से अल्सर होता है। अत्यधिक धूम्रपान, शराब, अधिक तेल-मसाले युक्त भोजन, तले हुए भोजन के सेवन से पेप्टिक अल्सर होता है। इसका लक्ष्ण यह है कि पेट के उपरी भाग में लगातार दर्द बना रहता है। कुछ भी खाने के बाद पेट दर्द होता है। ज्योतिषीय मत के अनुसार लग्नेश या लग्न पर जब शनि या मंगल की दृष्टि हो तो अल्सर होता है। कर्क या कन्या राशि में शनि या केतु होने पर, पांचवें भाव में मंगल की उपस्थिति होने से सूर्य या केतु के आक्रांत होने पर पेप्टिक अल्सर होने की आशंका रहती है। इस रोग से निवारण के लिए पन्ना या पीला नीलम मध्यमा या अनामिका अंगुली में धारण करें। रोग गंभीर हो तो माणिक्य या मूंगे की भस्म औषधि के रूप में सेवन करें। साथ में मून स्टोन भी धारण किया जा सकता है।
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